Wednesday, 6 July 2022

काश कभी ऐसी भी बारिश आये

 

काश कभी ऐसी भी बारिश आये

रिमझिम बरसते इन बारिशों में
काश कभी ऐसी भी
बारिश आये जिसमें
सबके अहम डूब जाए
मतभेद के किले ढह जाएं
घमंड चूर चूर हो जाए
गुस्से के पहाड़ पिघल जाए
नफरत हमेशा के लिए दफ़न हो जाये
प्यार की बारिशों में भींग जाये,
सौहार्द और सद्भावनाओं से
लबालब भरे ताल व तलैये हो,
दया और करुणा से भरी नदियां हो
और हम सब
"मैं" से "हम" हो जाएं ......
काश कभी ऐसी भी बारिश आये....
बस_यू_ही





Monday, 27 June 2022

ज़िन्दगी और हम

ज़िन्दगी और हम
उदास दिल, उलझी हुई ज़िन्दगी और थके हुए हम।

टूटा दिल, बिखरी हुई ज़िन्दगी और हारे हुए हम।

गुजरे हुए लम्हे, यादों में खोई हुई ज़िन्दगी और बदहवाश से हम।
बस यूं ही


Wednesday, 22 June 2022

पिता

पिता
पिता एक बच्चे के लिए एक उम्मीद है। 
उससे ही बंधी उसकी हर एक आस है।
पिता परिवार के लिए हौसलों और हिम्मत का स्तंभ हैं।

पिता कभी ना टूटने वाले भरोसे और विश्वास का नाम है।
देखने में लगते वो थोड़े से सख्त हैं,
लेकिन उनके दिल में भी दफन कई मर्म है।

पिता हर मुश्किल सवाल का जवाब हैं।
परेशानियों से लड़ने वाली दो धारी तलवार है।
पिता जिम्मेदारी के रथ का सारथी है,
अपने बच्चों को हक़ दिलाने में महारथी है।

पिता बचपन में हमें चलना सिखाता है।
भले ही जेब खाली हो, हमारी हर ज़िद
पूरी करते।

सारी दुनिया से हमें जिताना चाहते
और खुद हमसे हार कर खुशियां मनाते।
पिता से ही बच्चों की पहचान है,
पिता जमीर,जागीर और ईमान है। 

पिता हैं तो हम हैं और अगर,
हम हैं तो मतलब पिता हैं।
पिता दुनिया में रहे या ना रहे
देते वो हमेशा साथ है।


वो मेरे साथ भी पराया था....
और मैं हिज़्र में भी उसकी थी...
कैद कैसे मैं हो गयी हूँ आज...
पापा कहते थे मैं गिलहरी हूँ....

नीलम वन्दना

Saturday, 7 May 2022

मेरा स्पंदन तुमसे है मां

मेरा स्पंदन तुमसे है मां,
पहला स्पर्श तुम्हारा है,
ममता का भंडार भरा तुम्हारा है मां,
सदा बरसता प्यार का ख़ज़ाना है।
ना जाने कितने कष्टों को सहकर तू,
धरती पर मुझको लायी है।
पकड़कर उंगली चलना सिखाया,
बोलना,लिखना,पढ़ना सिखाया,
सही गलत का भेद बताया,
जीवन का हर वो पाठ पढ़ाया,
जो नहीं किसी स्कूल में पढ़ाया जाता।
नन्हे नाजुक बच्चे थे हम,
तुमने हमे भला इन्सान बनाया
अपने प्यार की परवरिश देकर
सबसे प्यार करना हमें सिखाया
गिर गिर के उठना और 
नहीं किसी से डरना
स्वाभिमान से आगे बढ़ना 
कुछ ऐसे ही जीवन में 
आगे बढ़ना हमें सिखाया 
क्यों होती है निःस्वार्थ मां
ये मां बनकर ही मैंने भी जाना
धीरज धरना कठिन वक्त में,
ख़ुश रहकर और ख़ुशियां देना
तुमने ही तो हमें सिखाया 
तुमसे ही तो घर है बनता
तुमसे ही तो जीवन सजता
तुम हो तो हम सब हैं
और तुममे ही वो रब है बसता
मेरी मां से सुंदर कोई नहीं,
मेरी मां इस जग का तारा है।
ये जीवन ऋणी है सदा तुम्हारा

मेरा स्पंदन तुमसे है मां,
पहला स्पर्श तुम्हारा है,

HAPPY MOTHER'S DAY💐

किताबें

यूं तो ये किताब कहलाती है,
जिनमें कागजों से बने कई 
पन्ने एक साथ जुड़े होते हैं।
और जिल्द में कैद होते हैं।
पर ये रूह से आज़ाद है।

इन पन्नों में कैद है,
किसी की भींगी हुयी आँखे, 
किसी के खिलखिलाते मोतीसे दांत, 
किसी की सांसो की लय पर
गूंजते खामोशी का तरन्नुम,
कैद है किसी के भावनाओं का समन्दर।

इन पन्नों में कैद है,
सदियों का इतिहास
धरा का भूगोल
आकाश मण्डल में
होने वाले
खगोलीय घटनाक्रम

इन पन्नों में कैद है
जलते शमा के
साये से लिपटे
परवाने की कहानी,
हर मुश्किल का समाधान।

इन पन्नों में कैद है  
वक्त का हर फलसफा, 
खुदा की की इबादत,
ना जाने कितनों के
जीवन का हिसाब किताब

इन पन्नों में कैद है
ज्ञान विज्ञान की 
अनगिनत कहानी
अंकों की कारीगरी
शब्दों की जादूगरी

यूं तो ये किताब कहलाती है,
जिनमें कागजों से बने कई 
पन्ने एक साथ जुड़े होते हैं।
और जिल्द में कैद होते हैं।
पर ये रूह से आज़ाद है।
नीलम वन्दना

Thursday, 21 April 2022

यादों के झरोखों से

जब कभी मिलते हैं सुकून के कुछ पल
यादों के झरोखों से झांकता आ ही जाता हैं बीता हुआ कल,

बचपन की वो नटखट सी शरारतें
पड़ोसियों के वो बेसुमार उलाहने
दोस्तों संग किये गये, पार्टीयों के तकादे,
असाइनमेंट के लिए अध्यापकों की डांटे
जानें कितनी यादें बरबस आ ही जाती है,

जब कभी मिलते हैं सुकून के कुछ पल,
यादों के झरोखों से झांकता आ ही जाता हैं बीता हुआ कल,

भाई बहनों से बात - बात पर होने वाले झगड़े,
मम्मी पापा से हर बार मिलती हिदायतें,
नानी - दादी से सुनें हुए कहानी किस्से।
जानें कितनी यादें बरबस आ ही जाती है,

जब कभी मिलते हैं सुकून के कुछ पल
यादों के झरोखों से झांकता आ ही जाता हैं बीता हुआ कल,

कुछ भिगो जाती है आंखों को वज़ह बेवजह,
कुछ छोड़ जाती है, चेहरे पर मुस्कराहटे
कभी गुजरे लम्हों की बहुत साफ़ नज़र आती है तस्वीरें,
ये यादें हैं और यादें कब सिमटी हैं सरहदों में,
जानें कितनी यादें बरबस आ ही जाती है,

जब कभी मिलते हैं सुकून के कुछ पल
यादों के झरोखों से झांकता आ ही जाता हैं बीता हुआ कल,
नीलम वन्दना

Thursday, 14 April 2022

शिव ख़ास हैं

शिव ख़ास हैं
क्योंकि वो अजर
अविरल और
अविनाशी हैं

शिव ख़ास हैं
क्योंकि वो सरल सत्य
और सनातन है।

वे सिखाते हैं
बहुत सरलता व
सहजता से
प्रेम करना
प्रेम में सम्मान करना
समर्पित होना

खुद को खाली कर देते हैं
शक्ति के प्रेम में
पार्वती के लिए करते हैं नृत्य
हिमालय के सामने

इसलिए आज भी स्त्रियां
राम सा बेटा, कृष्ण सा प्रेमी
और शिव जैसा पति चाहती हैं

हर हर महादेव🙏🏽