Tuesday, 21 August 2018

Well-Known-Chipku

Well-known Chipku हा यही नाम तो दिया था अखिल ने विभा को जिस रात वो पहली बार मिले थे | विभा अखिल से अपने लिए ये सम्बोधन सुन कर मुस्कराते हुये अखिल की आखो मे देखती हुई समझने की कोशिश करती रह गयी कि उसने प्यार से कहा या मजाक मे. ...
    आज ना जाने क्यो विभा को अखिल की बहुत याद आ रही थी | कैसे अखिल उसके एक एक मैसेज के लिये  इन्तजार किया करता था , रोज घडी मे तीन बजते ही कभी फेसबुक पर , कभी याहू मैसेन्जर पर और फिर मेल पर उसके मैसेज आने लगते थे, और फिर एक दो मैसेज के बाद मान मनुहार भी शुरू हो जाता फिर विभा भी जवाब दे दिया करती | धीरे धीरे कब विभा को अखिल के मैसेजो का इन्तजार रहने लगा उसे पता भी नही चला | वह 3 बजते ही किसी ना किसी बहाने से कम्प्यूटर के सामने बैठ जाती और उदय के मैसेज के साथ उन दोनो मे शहद मे डूबी बातो का दौर शुरू होता तो समय का कुछ पता ही ना चलता | विभा को कभी कभी अखिल के मैसेज कुछ अजीब जरूर लगते थे और जब वह इस विषय मे कुछ बोलती तो  मै तुमसे फ्लर्टीगं नही प्यार करता हूँ  जानेमन,जिगर का छल्ला , चश्मेबद्दूर लिखा हुआ मुस्कराते स्माइल के साथ अखिल का एक मैसैज कम्प्यूटर स्क्रीन पर चमक जाता और विभा भी मुस्करा कर ठीक है जानेमन बोल देती |
                 उस दिन भी तो विभा लन्च के बाद अपने आफिस मे ही बैठी कुछ काम कर रही थी जब उसके मोबाइल पर एक अनजाने न. से काल आया था, विभा  मार्केटिग के जाब करती थी सो उसके नम्बर पर अनजान नम्बर से काल आया करती इसलिए उसे कुछ भी अजीब नही लगा लेकिन फोन उठाने के बाद दूसरी तरफ से आवाज आयी ....हैलो , पहचाना मुझे  विभा आश्चर्य से नही आप कौन ..मै रोज ही तो हमारी बात होती है मै अखिल उदयपुर से ..इतना सुनते ही विभा को खुश तो हुई लेकिन उसे आश्चर्य भी बहुत हुआ .. हा जी पहचान तो गये लेकिन आपको मेरा नम्बर कहा से मिला बस इतना ही पूछ पायी थी विभा | जी वो आपके फेसबूक प्रोफाईल से मिला | विभा... लेकिन वहा से तो मैने बहुत पहले ही हटा दिया है अपना नम्बर और आप तो आज इतना ही बोल पायी थी कि उधर से अखिल बोला हा जी मैने भी बहुत पहले ही लिया था पर फोन आज कर रहा हू|
     फिर दौनो देर तक बाते करते रहे | अब तो अक्सर ही जब भी विभा मैसेन्जर पर जवाब देने मे देर करती अखिल की काल आ जाती | जून की गरमी के दिन थे जब विभा के पास ऊदयपुर के कालैज से इन्टरव्यू के लिये बुलावा आया, विभा ने कितना खुश होते हुये अखिल को बताया था कि उसके शहर ने उसे  बुलावा भेजा है और वह उसके शहर की मेहमान बनने वाली है| अखिल भी तो सुन कर बहुत खुश हुआ था और होता भी क्यो ना इतने दिनो बाद दोनो के मिलने की सम्भावना जो नजर आयी थी| विभा को अखिल ने फोन से उसके कालेज का पूरा रास्ता कैसे कैसे जाना है सब समझा दिया | विभा के उदयपुर पहुचने पर वह पल पल की खबर लेता रहा| विभा के कालेज पहुच जाने पर उसने बेस्ट विशेज दी और धीरे से पूछा क्या हम मिल सकते है .. विभा ने भी थैक्स के साथ कहा आज तो यही पूरा दिन लग जायेगा कल मिल सकते है लेकिन शर्त होगी कि एक दिन मे पूरा शहर घूमाना होगा | अखिल तुरन्त तैयार होगा वो तो मिलना चाहता ही था| फिर अगले दिन दोनो मिले खूब सारी बाते हुयी और शाम को विभा अपने शहर चली गयी और अखिल यादो मे| अब दोनो के बीच बातो का सिलसिला कुछ ज्यादा भी हो गया था दिन मे भी रातो को भी धीरे धीरे विभा को भी विश्वास हो गया कि अखिल उससे प्यार करता है|और जब अखिल को ये लगने लगा कि विभा उसके प्यार मे डूब चुकी है तो वह धीरे धीरे कटने लगा| उस दिन भी तो विभा ने ना जाने कितनी मिन्नते करके कितनी मुश्किलो से अखिल को बुलाया था| और अखिल भी कितने प्यार से बाते करता रहा पूरे समय , समय कैसे गुजर गया पता ही नही चला | हा बातो बातो मे ही अखिल ने उसे well-known Chipku बोल दिया था , जो विभा को समझ नही आ रहा था कि अखिल ने मजाक मे बोला,प्यार मे बोला या सच मे बोला...और अगर विभा well-known Chipku थी तो अखिल भी किसी chipku से कम तो नही था ...अखिल को तो उसके भावनाओ के साथ खेलना ही था ,  बेवकूफ तो वो खुद थी जो ऐसे अखिल की बातो मे उलझ गयी

Saturday, 6 June 2015

इत्तेफाक नहीं होता !


मिलाना और बिछड़ जाना किसी का महज़ इत्तेफाक नहीं होता !

दर्द का दमन थाम लिया हो तो जख्मों के कहर का कुछ आभास नहीं होता !

मिटने मिटाने का हुनर जानने वालो को खुदी से बेखुदी का डर नहीं होता!

कोई अजनबी इस कदर दिल का मेहमान नहीं बनता !

मौका परस्त तो होते है इन्सान वफ़ा का ऐसा हाल नहीं होता !

एक तस्वीर


 अपनी ही एक तस्वीर मुझे भाती है, 
उसे देखा कर बहुत सी बाते दिल में आती है,
अपनी मुश्कान जब मैं देखती हूँ,
तो लगता है क्यों ये सिर्फ कुछ पलों के लिए थी,
आँखों में जब देखती हूँ चमक,
तो याद करती हूँ कौन सी बातो ने जलाये थे उनमे दिए?
मैं अगर कभी ऐसी थी, तो सदा ही ऐसी क्यों नहीं?
वो धुप छाव की रोशनी बिखरी है जो चेहरे पर इस जीवन,
 इस जीवन की बहुत सी सच्चाई दिखा जाती है,
मैं जब कभी परेशान बहुत हो जाती हूँ,
गमगीन हो कर दिल खुद का ही दुःखाती  हूँ ,
और जब कभी कभी हार जाती हूँ जिंदगी की बाज़ी,
तब वो तस्वीर ही खुद से प्यार करना सीखाती हैं,

अपनी ही एक तस्वीर मुझे बहुत भाती  है। ....  

मेरी जान ही तुम हो।।

मेरी यादों मे तुम हो,या मुझमें ही तुम हो । मेरे ख्यालों मे तुम हो या मेरा खयाल ही तुम हो । दिल मेरा धड़क कर पूछे बार-बार एक ही बात मेरी जान मे तुम हो या मेरी जान ही तुम हो।।

मेरी तकदीर

मेरी यादों में तुम,मेरी सांसों में तुम।मेरी आँखों में तुम,मेरे ख्वाबों में तुम।मेरे ख्यालों में तुम मेरे अल्फाज़ो में भी तुम ।मेरी जिंदगी और जीने की वजह तुम हो।मेरी हर सुबह तुम्हीं से और शब भी तुम।रास्ता भी तुम हो और मन्जिल भी तुम्हीं। मेरे आसपास साया हैं तेरा फिर भी मेरी तकदीर में तेरा नाम क्यों नहीं।। में
तेरा नाम क्यों नहीं।।

Monday, 25 May 2015

कोई इतना याद आता हैं

कोई इतना याद आता हैं , जब दिल ख़ामोशी पाता हैं ,
 हम दुनिया भूल जाते हैं , बस आँखों से आंसू निकल आते हैं !!

 हर वख्त एक दर सताता हैं,  कोई इतना याद आता हैं,
जब दिल ख़ामोशी पाता  हैं !!
 वो हमसे खफा नहीं ना हम उनसे नाराज पर
 इस दुरी से क्यों ये दिल पागल हो जाता हैं, 
 कोई इतना याद आता  हैं, जब दिल ख़ामोशी पाता  हैं !!
 भरोसा था कभी खुदा पर और किया प्यार का एक वादा था
 आज खुदा भी बेवफा नजर आता  हैं, 
कोई इतना याद आता हैं,  जब दिल ख़ामोशी पाता  हैं !! 

Friday, 1 August 2014

युद्ध में आप मिटाकर जीतते हैं और प्रेम में आप मिटकर जीतते हैं



स्वर्ग में विचरण
करते हुए
अचानक एक दुसरे के
सामने आ गए
🐉🐉🐉
विचलित से
कृष्ण ,

प्रसन्नचित सी
राधा...
💕💕💕
कृष्ण सकपकाए,
राधा मुस्काई

इससे पहले कृष्ण
कुछ कहते
राधा बोल उठी
"कैसे हो द्वारकाधीश ?"

जो राधा उन्हें
कान्हा कान्हा
कह के बुलाती थी

उसके मुख से
द्वारकाधीश का
संबोधन
कृष्ण को
भीतर तक
घायल 
कर गया
फिर भी किसी तरह
अपने आप को
संभाल लिया

.....और बोले राधा से
मै तो तुम्हारे लिए
आज भी कान्हा हूँ
तुम तो द्वारकाधीश
मत कहो!

आओ बैठते है ....
कुछ मै अपनी कहता हूँ
कुछ तुम अपनी कहो
सच कहूँ राधा
जब जब भी
तुम्हारी याद
आती थी
इन आँखों से
आँसुओं की बुँदे
निकल आती थी

बोली राधा ,मेरे साथ
ऐसा कुछ नहीं हुआ
ना तुम्हारी याद आई
ना कोई आंसू बहा
क्यूंकि हम तुम्हे
कभी भूले ही कहाँ थे
जो तुम याद आते
💍💍
इन आँखों में सदा
तुम रहते थे
कहीं आँसुओं के
साथ निकल
ना जाओ
इसलिए रोते भी
नहीं थे
💦💦💦
प्रेम के अलग होने पर
तुमने क्या खोया
इसका इक आइना
दिखाऊं आपको ?
♨♨♨
कुछ कडवे सच ,
प्रश्न सुन पाओ तो
सुनाऊ?
💎💎💎💎
कभी सोचा इस
तरक्की में तुम
कितने पिछड़ गए
🌀🌀🌀🌀
यमुना के मीठे पानी
से जिंदगी शुरू की
और समुन्द्र के
खारे पानी तक
पहुच गए ?
🐾🐾🐾
एक ऊँगली पर
चलने वाले
सुदर्शन चक्र
पर भरोसा कर लिया
और दसों उँगलियों
पर चलने वाळी
बांसुरी को
भूल गए ?
💋💋💋💋
कान्हा जब तुम
प्रेम से जुड़े थे तो ....
जो ऊँगली
गोवर्धन पर्वत
उठाकर लोगों को
विनाश से बचाती थी
☔☔☔☔☔
प्रेम से अलग होने
पर वही ऊँगली
क्या क्या रंग
दिखाने लगी
सुदर्शन चक्र
उठाकर विनाश के
काम आने लगी
💥💥💥💥
कान्हा और
द्वारकाधीश में
क्या फर्क होता है
बताऊँ
कान्हा होते तो
तुम सुदामा के
घर जाते
सुदामा तुम्हारे घर
नहीं आता
💥💞💥💞
युद्ध में और प्रेम
में यही तो फर्क
होता है
💥💥💥💥
युद्ध में आप मिटाकर
जीतते हैं
💞💞💞💞
और प्रेम में आप मिटकर
जीतते हैं
💞💞💞💞
कान्हा प्रेम में
डूबा हुआ आदमी
दुखी तो रह सकता है
पर किसी को
दुःख नहीं देता
🙏🙏🙏
आप तो कई
कलाओं के स्वामी हो
स्वप्न दूर द्रष्टा हो
गीता जैसे ग्रन्थ
के दाता हो
पर आपने
क्या निर्णय किया❓❓
अपनी पूरी सेना
कौरवों को सौंप दी?
और अपने आपको
पांडवों के
साथ कर लिया
सेना तो आपकी
प्रजा थी
राजा तो पालक होता है
उसका रक्षक होता है
💍💍💍💍
आप जैसा महा ज्ञानी
उस रथ को
चला रहा था
जिस पर बैठा
अर्जुन
आपकी प्रजा को ही
मार रहा था❓❓❓
आपनी प्रजा को
मरते देख
आपमें करूणा
नहीं जगी❗❗
क्यूंकि आप
प्रेम से शून्य ⭕⭕
हो चुके थे
आज भी धरती
पर जाकर देखो
अपनी
द्वारकाधीश
वाळी छवि को
ढूंढते रह जाओगे
हर घर हर मंदिर में
मेरे साथ ही
खड़े नजर आओगे
🐉🙏🙏
आज भी मै मानती हूँ
लोग गीता के ज्ञान
की बात करते हैं
उनके महत्व की
बात करते है
मगर धरती के लोग
युद्ध वाले
द्वारकाधीश.
पर नहीं
प्रेम वाले कान्हा
पर भरोसा करते हैं
💁💁💁
गीता में मेरा 
दूर दूर तक नाम 
भी नहीं है
पर आज भी लोग 
उसके समापन पर
🌷🌷🌷🌷🌷🌷
" राधे राधे" करते है