Sunday, 10 May 2020

Maa_ka_Lockdown

Maa_ka_Lockdown

        आज मदर्स डे पर भी लॉकडाउन है,  तो अब बात करते है उस लॉकडाउन की जो हर माँ लगाती है  कभी ना कभी अपने बच्चों पर....
          मेरी माँ दुनिया की सबसे नायाब और बेमिसाल माँ थी । जो हर बच्चे को उसकी मे लगती हैं और बहुत हद तक वो अपने बच्चे के लिये होती भी है।
          दिमाग पर  बहुत जोर देने के बाद भी मुझे ऐसा कोई लॉकडाउन याद नहीं आता जो  मेरी मम्मी ने ऐसा कुछ किया हो, क्योंकि हम सभी भाई बहनों पर लॉकडाउन लगाने की पूरी जिम्मेदारी अनकहे रूप में हमारी बड़की जिज्जी ने जो ले रखी थी। बाकी बचा खुचा कसर पापा जी पूरा कर देते थे।
            यू तो हम सब भाई बहन जिज्जी की नजरों से ही सहम जाते थे, एक वक़्त था जब पूरे घर मे उनकी ही तानाशाही चलती थी, लेकिन अब लगता है कि जिज्जी  भी जितनी दिखती थी उतनी बड़ी वाली हिटलर नहीं थी। हॉ वो मम्मी की अच्छी वाली सहयोगी थी। मम्मी जो काम हम लोगो से कराना चाहती करा लेती और जो नहीं कराना चाहती उसे जिज्जी से बड़े प्यार से मना करा देती।
              यू  तो मम्मी और जिज्जी की मिलीजुली सरकार ने हमलोगों के बचपन में अव्वल तो कोई बहुत लॉकडाउन कराया  नहीं है पर जो लॉकडाउन कराया भी वो बहुत मामूली हुआ करते थे, जैसे जब तक होमवर्क पूरा नही होता कही नही जाना है। जब तक ये काम पूरा नहीं होता (कोई भी छोटा मोटा काम ) नही होता खाना नही मिलेगा। या फिर सबसे खतरनाक होता था कि करो तुम अपने मन की फिर समझे रहना। इसके बाद तो हम जहॉ होते थे बस वही थम से जाते थे।
                अन्धेरा होने के बाद घर से बाहर नही रहना है, ये था सबसे बड़ा वाला लॉकडाउन जिसे कमोबेश घर के सभी लोग मानते थे और इस लॉकडउन में समय और जरूरत के मुताबिक  बदलाव तो आया है। लेकिन बचपन से पड़ी इसकी आदत के कारण अब भी काम खत्म होने के बाद  सबसे पहले घर का रास्ता दिखता है।
             ये सारे लॉकडाउन जो बचपन से हम सभी सहते आये है, जिसे कभी माँ ने लगाया या कभी माँ की मर्जी से जिज्जी , बड़े भाईया  या पापा ने इन सबका बहुत अहम किरदार होता हैं  हमें एक भला इन्सान बनाने में। इसीलिये माँ तो बस माँ होती है।
यूँ ही नहीं होता
          “माँ” का दर्जा ‘सर्वोत्तम’
ना जाने कितना
          ‘त्याग’ और ‘संघर्ष’
छुपा होता है इस शब्द के पीछे❣️
     Happy_Mothers_Day_every_mother



Saturday, 2 May 2020

Discribe_me_in_one_word

          Discribe_me_in_one_word

       
       कितना आसान है ना किसी से भी ये सवाल पूछ लेना "Discribe me in one word" और शायद उतना ही आसान है इस सवाल का जवाब दे देना भी, इसके कई सारे जवाब हो सकते है |
      लेकिन अब जरा इसी बात को दूसरे नजरिये से देखियेगा .... आपने तो इसे बस यू ही पूछ लिया , लेकिन क्या ये वाकई इतना आसान सा सवाल है और इसका जवाब दे पाना भी उतना ही आसान है ,जवाब होगा कत्तई आसान नहीं है इसका जवाब।  उनके लिए जिनके लिए आप बहुत कुछ हो| वो आपसे बे -ईन्तहा प्यार करते है | आपका सम्मान करते है | उनके जीवन की कोई भी खुशी आपके बिना अधूरी है , कोई भी गम हो वो सबसे पहले आपको बता के हल्के हो जाते है| इन सबका जवाब होगा नही इतना आसान भी नही है अपने किसी प्यारे से रिश्ते को एक शब्द मे बांध देना | ये एक प्रकार से अन्याय होगा उस रिश्ते के प्रति ,उस रिश्ते के प्रति उनके भावनाओ का...
         और हॉ अगर आपकी बहुत ज्यादा किसी से दुश्मनी हो तो ये समस्या थोडी कम हो जाती है लेकिन फिर भी एक शब्द मे बांधना आसान नही है|
     किसी के पूरे जीवन चरित्र और उसके लिए अपने भावनाओ को सीमित शब्दो मे तो बताया जा सकता है लेकिन एक शब्द मे कत्तई नही.... कई बार कुछ सवालो के जवाब जितने मुश्किल होते है उतने लगते नही है|

#बस_यू_ही...

Wednesday, 15 April 2020

CARONA - 2019 : A LOVE STORY

CARONA - 2019 : A LOVE STORY

             दिव्यान्शी आज से ही क्वारटाइन में थी । अंश का भी क्वारटाइन शुरू हो गया था। दिव्यांशी सोच में बैठी थी कि अकेले अंश के बिना ये 14 दिन कैसे गुजरेगें।अपनी शादी के बाद से ही दोनो कभी भी एक दिन के लिये भी अकेले नहीं रहे थे। ये 14 दिन दोनों को  सालों जैसे लग रहे थे। कुछ महीने पहले ही तो दोनो की शादी हुयी थी। दोनों ही पेशे से डाक्टर थे। शादी के बाद अंश बाहर जाने का प्लान बना ही रहा था, कि ये करोना नामक विलेन ने उनकी शान्त खुशहाल ज़िन्दगी मे भूचाल ला दिया। दोनों की ही सारी छुट्टियाँ कैन्सिल कर दी गई।
            दिव्यांशी और अंश ने भी हालात की मॉग और जरूरत देखते हुये पूरे तत्परता और समर्पण के साथ करोना पीड़ित मरीजो की इलाज में लग गये थे। अब तक दोनों 200 से ज्यादा करोना के मरीज़ो को इलाज कर चुके थे। कितनी मासूम थी वो 15 साल की बच्ची जिसकी मौत दिव्यांशी के सामने करोना से हो गयी थी। उस बच्ची के  मौत ने उसे बुरी तरह से उसका आत्मविश्वास हिला दिया था। जब जब दिव्यांशी को वो बच्ची की मौत याद आती उसकी रूह तक सिहर जाती उसे लगता कि मैं अब कभी भी अपने अंश से नहीं  मिल पाउँगी और वह परेशान हो जाती। वैसे तो दिन में रोज कई बार फोन पर उसकी अंश से बात हो जाती थी और वह हिम्मत भी देता।
               धीरे धीरे वक्त गुजरता जा रहा था,जब जब दिव्यांशी परेशान होती थी ,अंश उसे समझाती और जब अंश परेशान होता तो दिव्यांशी उसे समझाती। दोनों एक दूसरे की कमजोरी भी थे ताक़त भी थे और हिम्मत भी। दोनों एक दूसरे को हिम्मत देते कि परेशान मत हो हम मिलेंगे और जल्दी ही मिलेगें।
                आज दोनों का क्वारटाइन खत्म होने को था। दोनो ने करोना टेस्ट के लिये अपने अपने सैम्पल दिये थे। दोनों के मन मे एक विश्वास तो था कि रिपोर्ट नेगेटिव ही आयेगा लेकिन साथ ही थोड़ा डर भी लग रहा  था  कि जाने क्या होगा।
               थोड़ी देर बाद अंश अपने हाथो में दोनों का रिपोर्ट  लिये दिव्यांशी के सामने खड़ा था। दिव्यांशी को पता नहीं था कि रिज़ल्ट क्या है, उसकी धड़कन बढ़ गयी थी , साँसें थम सी गई थी। अंश को इतने दिनों बाद अपने सामने देख कर दिव्यांशी को खुद को रोकना बहुत मुश्किल हो रहा था। तभी अंश ने अपनी बाँहो को फैलाते हुये उसे बताया कि दोनों की रिपोर्ट  नेगेटिव आयी है और वह घर चल सकते हैं। ये सुन कर दिव्यांशी के ऑखों से खुशी के आँसू  निकल पड़े और वह अंश के बाहों में समा गई।


Wednesday, 11 March 2020

बाते_अभी_बाकी_है 2






बाते_अभी_बाकी_है 2
जिन्दगी_के_सफर_अभी_और_भी_है|
      जिन्दगी  दरअसल नाम है एक निरन्तर चलने वाले उस सफर का जो हमारे जन्म से प्रारम्भ हो कर मृत्यु तक चलती ही रहती है , जिसमे हम कई छोटे छोटे ,और कई बडे सफर भी करते है , और हर सफ़र वस्तुतः ख़ुद को ही तलाशने ,तराशने का सफ़र होता है और उसके साथ परिपार्श्विक को जानते हैं हम।
कहीं हड्डियों की मजबूती , कहीं रिश्तो की कशिश,
कहीं मन की गहराई , और कहीं भावनात्मक जुडाव
कहीं हृदय का प्रेम और कहीं आँखो की चमक ....और इसी अनन्त यात्रा का नाम है जिन्दगी और हर आदमी यात्री। हर यात्री के अनुभव भिन्न| हर आदमी की कुछ तलाश पूरी होती कुछ अधूरी.. हर आदमी कुछ खुद को तराशता और कुछ तराशने की कोशिश अधूरी ही रह जाती ...
बस यू ही...


बाते_अभी_बाकी_है 1

बाते_अभी_बाकी_है 1
इन्सानो की दुनिया मे इन्सान इन्सानो से ही अपनी पहचान छुपाने के लिये नक़ाबपोश बन जाता है और गुजरते वक्त के साथ चेहरो से उतरते नक़ाब मन मे घृणा भर जाते है | खुद पर ग्लानी होने लगती है ,किन्तु  यकिन मानिये ऐसे लोग ही आपको मासूमियत और भोलेपन की दुनिया से कही दूर ले जा कर दुनियादारी का सबक सिखाते है और समझा देते है कि कस्मे_वादे_प्यार_वफा_सब_बाते_है_बातो_का_क्या
बस_यू_ही... कुछ_यादे...


बातें_अभी_बाकी_है 3

             "इश्क़ तो लम्हें में हुआ करता है ,
पर यादें बरसों रह जाती है !!" और ऐसे ही लम्हों को इकठ्ठा कर हमने ज़िन्दगी की आमानत बना लिया।
            यही कही कभी मिला था वो, अनजाना सा अजनबी सा बातें शुरू हुयी और धीरे धीरे कभी ना खत्म होने वाली बातें का सिलसिला चला, लोग ज़िन्दगी में हो कर भी ज़िन्दगी नहीं होते लेकिन ना जाने क्या था उस शख्स में, जो कभी भी ज़िन्दगी में शामिल ना था फिर भी  ज़िन्दगी का हिस्सा बन गया।
            जानते हैं  दुनिया में सबसे खूबसूरत महिला कौन होती हैं ? जो बेलौस हंसी हंसती हैं, इतना कि आंखे तर हो जाये, और सबसे सुन्दर पुरुष कौन है,?  वो जो ख़ामोश मुस्कुराये तो स्त्री के दिल में हलचल कर दे। ऐसा ही था वो शख्स । उसकी खामोशी भी बहुत कुछ बोल जाती हैं।
            हमने कहीं पढ़ा था कि हर आदमी में थोड़ी सी औरत होनी चाहिए, और हर औरत में थोड़ा सा आदमी। और ऐसा ही था वो ,अपने आप में सम्पूर्ण..... अच्छा बेटा , अच्छा पति, अच्छा पिता अच्छा दोस्त और हे इन सब से अलग वो एक बेहतरीन इन्सान है। जो आज के दौर में भी किसी का भला भले ना कर सके लेकिन बुरा तो नहीं  ही करता। सबसे अलग था उसका अन्दाज़ सबसे जुदा था उसका लहजा। भरी महफिल में किसी को कैसे अकेला करते हैं कोई उससे सीखे....और अकेले में महफिल लगाने की कला में माहिर. ... हर एक जीव पर प्यार लुटाने की फ़ितरत उसे खुदा ने खुद बख्शी थी।
            मेरे में उसे हमेशा एक अच्छा दोस्त दिखा है,  और उसके रूप में एक दोस्त के साथ साथ समय समय पर और भी कई रिश्तों की झलक मिलती है।
      मैं उस शख्स से कभी रूबरू नहीं हु़यी, लेकिन मेरे घर की बेताब सी, बेबाक़ सी दीवारें.....
उसकी यादों की ख़ूबसूरती से भरी दरारें में
उसके आने के बेचैनी से इंतज़ार करती हैं और बेकरारी मेरी बढ़ाती है।

खुदा_करे_कि_कयामत_हो_और_वो_आये

बातें_अभी_बाकी_है

Thursday, 23 January 2020

यादें

वो अजब मुलाकात की गजब कहानी, 
वो सुहानी शाम और कॉफी के मगो का टकराना ....
कुछ तो है मौसम का शुरूर और...
कुछ है मोहब्बत का नशा .....
कुछ कही और बहुत 
सारी अनकही बात....
एक दूजे के हाथों में 
एक दूजे का हाथ...
कितना सोणा है ...
हम दोनों का साथ....
बस यू ही।