Monday, 26 October 2020

HathrasGangRape

 27th Sep. 2020 को हम बड़े जोर शोर से Daughter Day मनाते है। बहुत से लोगों को परेशानी भी  होती हैं कि ऐसा क्या है कि  जिसे देखो बोलते नही थकता कि #मेरी_बेटी_मेरा_अभिमान  अरे कभी #मेरा_बेटा_मेरा_अभिमान भी तो बोल के देखो,  और 

29th September.  2020 को हमारे ही समाज के कुछ बेटे हमारी ही बेटी के साथ दरिंदगी कर जाते हैं और बेटी मौत की गोद में सो जाती हैं। ऐसा नहीं कि यह सब हमारे  बीच में पहली बार हुआ है, नही ये कई बार हो चुका है। हर उम्र की बेटी के साथ हो चुका हैं लेकिन हम हर बार की तरह एक बार फिर हमेशा की तरह थोड़ा बहुत शोर शराबा, नारे  बाजी करते है और फिर हाथ पर हाथ धरे बैठ जायेगें। 

आज हर बेटी कहना चाहेगी कि भले से आप सब  मत मनाये  Daughterday ,कभी मत बोलिये #मेरी_बेटी_मेरा_अभिमान लेकिन हमे जीने  दीजिये। हम भी तो आपके समाज का आधा अंग है। हमारे बिना तो आपकी भी दुनिया बेमानी है फिर क्यों हमे इज्जत से सुकून के साथ सिर्फ इन्सान मान कर क्यु नही जीने देते। 

#HathrasGangRape

काव्यान्जली : दर्द का रिश्ता

 काव्यान्जली : दर्द का रिश्ता


         अपने फ्लैट की बालकनी मे बैठ के चाय पीते हुए मैं काव्यांजलि के बारे मे सोचते हुये अतीत में चली गयी थी।  काव्यांजलि  

कल तक 13 वर्ष की कितनी प्यारी, मासूम और चुलबुली सी बच्ची थी । पूरी काॅलोनी की रौनक उससे बरकरार रहती थी। काव्यांजलि के होते काॅलोनी का कोई शख्स दुखी या परेशान नहीं रह सकता था। वह हर समय सबकी मदद के लिये हंसते हुए तैयार रहती थी ,और आज जब उसे मदद की जरूरत है...........तब !!! तब सब अपनी अपनी महानता की गाथा सुना रहे थे और स्वार्थ की रोटियाँ सेकने में व्यस्त हो गये थे। वो कितना  रोई  , चीखी ,चिल्लाई  थी । लेकिन किसी ने ना सूनी उसकी चीखे !! उन दरिन्दों ने कितनी बेदर्दी से नोच डाला था उस मासूम के पैरों को, उसकी जिव्हा को काट दिया था और हड्डियों के कई टुकड़े कर डाले !! उफ्फफ........

        सोचते हुये एकदम से एक झटका सा लगा कि अरे ये क्या कर रही हूँ मैं ? आज काव्यांजलि को हम सबकी , सबसे ज्यादा जरूरत है , मेरी बच्ची दर्द से कराहते हुये पुकार रही और हम सब यू बैठ कर चाय पी रहे हैं, टेलीविज़न पर उसके दर्द का कैसे पोस्टमार्टम होता देख रहे। नहीं अब और नहीं देख सकती मेरी बच्ची मैं आ रही हूँ तेरे पास। अब बिल्कुल भी परेशान ना होना । मैं साथ हूँ तेरे ..आज भी  .... कल भी और हमेशा... तेरे साथ ही रहूंगी। 

मेरी बच्ची यू नहीं हारने दूंगी तुम्हें , तेरे साथ दरिन्दगी करने वालों को ऐसी सजा दिलाऊंगी कि सहम जायेगी ये दरिन्दों की सारी क़ौम.....  फिर कोई और काव्यांजलि नहीं  होगी दरिन्दगी का शिकार....मेरी बच्ची मैं हूँ ना तेरी माँ। मेरा तेरा तो दर्द का रिश्ता भी है। 

नीलम वन्दना

https://lakshyajalpaiguri.blogspot.com/2020/10/blog-post_85.html?m=1



रवायत

 #रवायत

एक रवायत है ये जिंदगी, 

जिसे कायम रखना है।

मिट्टी को बस,

मिट्टी में तब्दील करना है।

ये जिम्मेदारी कब किसके कंधो पे आ जाये,

किसको है क्या खबर।

बंधन और मुक्ति का ये खेल ,

बस यही हैं ज़िन्दगी और 

यही है इस ज़िन्दगी की रवायत।।

बस_यू_ही

असामान्य से दिन

 कई बार चुभते है

असामान्य से ये दिन

उत्सवों की भीड़

और इतनी तैय्यारी

जाने क्यूं

ऐसा लगता है

सब बेवजह खुद को

बहलाने में जुटे है

जीना नहीं चाहते

फिर भी जिये जा रहे हैं

ज़िन्दगी के इस बोझ को 

ढोये जा रहे है।

बस_यू_ही

Sunday, 23 August 2020

तुम्हारा नाम

 कुछ गहरा सा लिखने का दिल किया , 

मैनें  उसे "मुहब्बत " लिख दिया! 


कुछ ठहरा सा लिखना का दिल किया , 

मैनें उसे "दर्द'' लिख दिया! 


कुछ समन्दर सा लिखने का दिल किया , 

मैनें  उसे "ऑसू"  लिख दिया! 


कुछ बिखरता सा लिखने का दिल किया , 

मैनें  उसे  "जुदाई" लिख दिया! 


सुनो, जब दिल कहा जिन्दगी लिखूं है, 

मैनें तुम्हारा नाम लिख दिया! 



Sunday, 16 August 2020

हे कान्हा!

हे कान्हा!
कारागार में जन्मे तुम,
गोकुल का पले तुम,
मथुरा में बढ़े तुम,
द्वारिकाधीश बन रहे तुम।

हे कान्हा!
वसुदेव-देवकी के लाल तुम,
-यशोदा का दुलार तुम,
मधुसूदन मदन गोपाल तुम,
नटवर नागर ब्रजलाल तुम।

हे कान्हा! 
माखन चोर कन्हैया तुम,
मुरली मधुर बजैया तुम,
मधुबन में रास रचैया तुम,
बलदाऊ का छोटा भैया तुम।

हे कान्हा! 
माखन चोर  मतवाल तुम,
केशव विराट विकराल तुम,
कंस के लिए महाकाल तुम,
भक्तों के लिए अमृत विशाल तुम।

हे कान्हा!
गोपियों का प्रिय सखा तुम,
राधा का प्रियतमा तुम,
रुक्मणि का श्री तुम,
सत्यभामा का श्रीतम तुम।

हे कान्हा!
गीता का ज्ञान तुम,
द्रौपदी का मान तुम,
पांडव का अभिमान तुम,
गांधारी का त्याग तुम,
रुकमणी का राग तुम।

हे कान्हा!
आत्मतत्व चिंतन तुम,
आत्मा का मंथन तुम 
प्राणेश्वर परमात्मा तुम,
यताति सर्वात्मा तुम,
स्थिर चित्त योगी तुम।

हे कान्हा! 
अनश्वर अविनाशी तुम,
देवलोक का वासी तुम,
निर्लिप्त योग के योगेश्वर तुम,
संतृप्त देव सा देवेश्वर तुम।
नीलम वन्दना


Monday, 3 August 2020

रक्षाबन्धन v/s फ्रैण्डशिपडे

                                रक्षाबन्धन  v/s  फ्रैण्डशिपडे 
                                           भाई_बहन
              भाई बहन एक दूसरे के जीवन में सबसे पहले शामिल होने वाला विपरीत लिंगी मित्र होते है, और वो भी तबसे जब आपको दुनिया में आये महज चन्द लम्हे हुये होते हैं।आपको खाने सोने और रोने के अलावा कुछ नही आता। किसी बात की समझ नहीं होती। 
               जीवन के आखिरी मित्र भी भाई बहन ही होते हैं जो पूरी तन्मयता से वक्त बे वक्त हर हाल में आपके साथ होते हैं, अब ये अलग बात है कि सारी उम्र आपकी सबसे ज्यादा लड़ाई, नोक झोक, भी इन्ही से होती हैं। कई बार ये खुद ही आपके लिये घर में  मुसीबत लाते हैं और फिर खुद ही बचाते हैं।
               बचपन से साथ पले बढ़े रिश्ते पर वक्त के साथ दूरियों के बाद भी कोई फर्क नहीं पड़ता।सारी भावनायें वो प्यार हो, गुस्सा हो लड़ना या चिढ़ाना हो वक्त के साथ वैसे ही बरकरार रहते हैं बस जाहिर करने का तरीका थोड़ा सा बदल जाता है। इस रिश्ते की महक, मिठास कभी कम नहीं होती। 
ये रिश्ता कभी फीका नही पड़ता।