Friday, 31 December 2021
नया साल
Monday, 20 December 2021
नव संकल्प के साथ नववर्ष का आगाज
अटल बिहारी वाजपेई जी
सन् 1924 क्रिसमस के दिन
इक सितारा उदय हुआ...
तब किसी को खबर नहीं ,
राजनीति के ब्रम्हांड में
ध्रुव तारा उदय हुआ था.....
राजनीति के तुफानों में भी
जिसने उम्मीदों का दीप जलाया था...
सत्ता से ऊपर है देश
हमेशा यही समझाया था....
जननायक कुछ ऐसे थे वो,
दलों को नहीं उन्होंने
लोगों के दिलों को जीता था.....
उनकी मधुर वाक्पटुता का रस
शत्रु भी सहर्ष पीता था.....
प्रखर थे वक्ता,कवि हृदय भी
भारतरत्न कहलाये है....
उनकी कवितायें सुनने
विपक्षी दल भी आए हैं.....
नहीं की शत्रुता कभी किसी से,
स्वस्थ प्रतिस्पर्धा वो करते थे....
विपक्ष का दम भी उनसे था,
सत्ताधारी डरते थे....
विश्व शांति के पक्षधर थे वो,
पर दुश्मन को सबक सिखाया था...
विश्व शक्ति के नाकों तले,
परमाणु परीक्षण कराया था,
नहीं डरता है भारत किसी से
यह दुनिया को बतलाया था।
एक बार एक मोहतरमा ने
प्रणय निवेदन भेजा था,
मुंह दिखाई के रस्म में उसने
कश्मीर को मांगा था।
निवेदन को स्वीकार कर
तब पूरा पाकिस्तान
दहेज में इन्होंने मांगा था..
ऐसे ही इनके हाजिर जवाबी के
किस्से जहां में चर्चित थे....
कृष्ण बिहारी जी के घर में
जन्मे उनके लाल थे....
अटल बिहारी नाम है जिनका
अटल इरादे रखतें थे।
Friday, 19 November 2021
कारवां मन्जिल की ओर
चलते जाओ नेक नीयत से,
नेकी के फरिश्ते मिल ही जाएंगे।
आज बेशक अकेले हो तुम सफर में ,
कल कारवां भी बनते जायेंगे।
बस यूं ही हिमाद्री वर्मा "समर्थ" ने भी नेक नियती के साथ 2014 से लिखना शुरू किया।और उनके लेखन की ख्वाहिश "ख्वाहिशों के समन्दर" से चल कर ख्वाहिशों की धारा में एहसास दिल के, मन के अल्फ़ाज़ और अल्फाजों के कारवां" से आगे बढ़ते हुए ये "कारवां मन्जिल की ओर" कहानी संग्रह के सम्पादन तक पहुंच गया है।
सम्पर्क साहित्य संस्थान के तत्वावधान में सम्पादित व साहित्यगार प्रकाशन द्वारा प्रकाशित "कारवां मन्जिल की ओर" एक ऐसा कहानी संकलन है, जो देश के विभिन्न क्षेत्रों में रह रही विभिन्न सामाजिक परिवेशो में रह रही 51 साहित्यिक अभिरुचि रखने वाली आधी शक्ति ने जो कुछ अपने आस-पास देखा महसूस किया , उसे कलमबद्ध किया। इन सभी कहानियों में समाज के विभिन्न परिस्थितियों से जूझती महिलाओं के सकारात्मकता व नकारात्मकता दोनों पक्षों के दर्शन होते हैं साथ हुआ विडम्बना वो विसंगतियों की व्यथा और जीवन संघर्ष परिलक्षित होता है। वो आंचल पाहवा की कहानी मूरत में बलात्कार पीड़िता का दर्द हो , या रिश्तों के महत्व समझाती अनिला बत्रा की कहानी रिश्तों की महक हो। बुजुर्गो के साथ ही परिवार का अस्तित्व बताता अंजली कौशिक की कहानी सोच हो या दहेज के दर्द को उकेरती और उसे अभिशाप समझने वाले निखिल का बिना दहेज शादी का निर्णय करने वाली डा. आशा सिंह सिकरवार की कहानी दहेज एक अभिशाप। ऐसे ही इस कहानी संग्रह की सभी कहानियां एक से बढ़कर एक हैं और सभी मानवीय मूल्यों को बनाए रखने का समर्थन करती है।संक्षेप में अगर आपको नारी संघर्ष और उपलब्धियों से जुड़ी हुई बातें पसंद आती है तो निसंदेह यह पुस्तक आपको पसंद आएगी।
कारवां मन्जिल की ओर
प्रथम संस्करण : 2022
ISBN :
978-93-90449-69-9
सम्पादन : हिमाद्री समर्थ
प्रकाशन। : साहित्यागार,
नामची मार्केट की गली
चौड़ा रास्ता, जयपुर
प्राप्ति का स्थान : amazon.in
flipkart.com
मूल्य : 300.00
काशी की संस्कृति और परंपरा
Sunday, 14 November 2021
जिन्दगी और मैं
जिन्दगी और मुझमें शुरू से ही ठनी थी।
उसे बड़ा करने की जिद्द थी ,
मेरी बचपन बचाने की मुहिम थी
जिन्दगी ने हर कदम एक नई चाल चली,
मैंने भी हर कदम उस चाल को यूं मात दी,
जब राहो में उसने वज़ीर कई खड़े किये,
तब मेरे बुद्धु से दिखते प्यादों ने भी कमाल किये,
चालो से भरे शह और मात के इस खेल में,
यूं ही जिन्दगी हमसे उलझती रही,
और हम भी अपने बचपन को चुरा कर निकलते रहे।
बाल दिवस
🥰
छोटी छोटी बातों पर,
तुनक के रूठने वाले,
छोटी छोटी बातों से
झट से खुश हो जाने वाले
बढ़ती हुई उम्र की गिनती में भी बचपन सी निश्छलता
व मासूमियत छुपा कर
रखने वाले बड़ों को भी ,
बाल दिवस की शुभकामना।
😎😎