Saturday, 7 May 2022
मेरा स्पंदन तुमसे है मां
किताबें
Thursday, 21 April 2022
यादों के झरोखों से
Thursday, 14 April 2022
शिव ख़ास हैं
शिव ख़ास हैं
क्योंकि वो अजर
अविरल और
अविनाशी हैं
शिव ख़ास हैं
क्योंकि वो सरल सत्य
और सनातन है।
वे सिखाते हैं
बहुत सरलता व
सहजता से
प्रेम करना
प्रेम में सम्मान करना
समर्पित होना
खुद को खाली कर देते हैं
शक्ति के प्रेम में
पार्वती के लिए करते हैं नृत्य
हिमालय के सामने
इसलिए आज भी स्त्रियां
राम सा बेटा, कृष्ण सा प्रेमी
और शिव जैसा पति चाहती हैं
हर हर महादेव🙏🏽
शिव है शाम-भोर !
Wednesday, 16 March 2022
अबकी फाल्गुन
अबकी फाल्गुन
अबकी फाल्गुन खेलूं मैं होली,
मथुरा में खेलूं होली फूलों संग
कान्हा की भक्ति से महकेगा अंग
रास महारास ले, आई है टोली,
अबकी फाल्गुन खेलूं मैं होली,
अबकी फाल्गुन खेलूं मैं होली,
अयोध्या में खेलूं होली रंग गुलाल,
रघुवर के भक्ति से डूबा हो ताल।
सिया और लखन से मिले हमजोली,
अबकी फाल्गुन खेलूं मैं होली,
अबकी फाल्गुन खेलूं मैं होली,
अवध में खेलूंगी होली सिंदूरी,
हनुमान के जैसी भक्ति में पूरी,
राम सीता हँसे कह देंगे भोली
अबकी फाल्गुन खेलूं मैं होली,
अबकी फाल्गुन खेलूं मैं होली,
काशी में खेलूं होली भस्म लगा,
भोले बाबा सी आसक्ति भगा,
शिवगण ने अब भाँग है घोली,
अबकी फाल्गुन खेलूं मैं होली,
नीलम वन्दना