Thursday, 14 April 2022

शिव है शाम-भोर !

शिव अविनाशी ,
शिव अविकारी है
शिव अधिश्वर है 
शिव है अनेकात्मा।

शिव सौम्य हैं 
शिव साहस हैं ,
शिव सत्य हैं 
शिव है सनातन "

शिव शशिधर हैं
शिव गंगाधर है,
शिव जटाधर है,
शिव है जगत्व्यापी।

शिव  विश्वेश्वर है,
शिव गिरीश्वर है,
शिव महेश्वर है,
शिव है कैलाशवाशी।

शिव उठत है, 
शिव चलत है, 
शिव है शाम-भोर !
हर हर महादेव 🙏🏻

Wednesday, 16 March 2022

अबकी फाल्गुन

अबकी फाल्गुन

अबकी फाल्गुन खेलूं मैं होली,

मथुरा में खेलूं होली फूलों संग

कान्हा की भक्ति से महकेगा अंग

रास महारास ले, आई है टोली,

अबकी फाल्गुन खेलूं मैं होली,


अबकी फाल्गुन खेलूं मैं होली,

अयोध्या में खेलूं होली रंग गुलाल,

रघुवर के भक्ति से डूबा हो ताल।

सिया और लखन से मिले हमजोली,

अबकी फाल्गुन खेलूं मैं होली,


अबकी फाल्गुन खेलूं मैं होली,

अवध में खेलूंगी  होली सिंदूरी,

हनुमान के जैसी भक्ति में पूरी,

राम सीता हँसे कह देंगे भोली

अबकी फाल्गुन खेलूं मैं होली,


अबकी फाल्गुन खेलूं मैं होली,

काशी में खेलूं होली भस्म लगा,

भोले बाबा सी आसक्ति भगा,

शिवगण ने अब भाँग है घोली,

अबकी फाल्गुन खेलूं मैं होली,

नीलम वन्दना


होली का त्योहार

होली का त्योहार
रीत - प्रीत संग गीत लिए
रंग - उमंग संग तरंग लिए ,
भेद भाव मिटाने दिलों का,
आया है होली का त्यौहार

सबको रंगो से भरा पूरा 
सतरंगी संसार मिले,
सबसे पहले हर एक को 
खुशियों का द्वार मिले.

भूल जाय सब राग द्वेष 
गैरों से भी अपनों सा 
सबको प्यार मिले

जातिवाद और उच नीच
के भेदभाव को अब 
जी भर कर तिरस्कार मिले,

आज के इस नये दौर में
सभी को उनका अधिकार मिले….

बने हुए हैं जो कन्हैया 
उन सब दीवानो को
सतरंगी रंगो मे डूबा 
उनको उनका प्यार मिले…

सड़कों पर जो मासूम घूम रहे,
उन सब को भी रंगों संग 
खुशियों की सौगात मिले...

वृद्धाश्रम में जो बैठे हैं, 
उन सब बुजुर्गों को गुझियों 
संग अपनो का साथ मिले।।
नीलम वन्दना

Saturday, 12 March 2022

मैंने संभावनाएं ढूंढी है शून्य में भी...

मैंने संभावनाएं ढूंढी है शून्य में भी,
मैं इतनी जल्दी हार भी तो नहीं मानती,
नकारात्मकता से कोई वास्ता नहीं मेरा....
 जिन हालातों में लोग नाउम्मीद हो जाते हैं, नहीं छोड़ती मैं उम्मीदों का दामन...
हैरान परेशान जिन्दगी से
खींच लाती हूं सुकून और खुशियों के कुछ पल...
कभी उगते कभी ढलते 
हुए सूरज से
तो कभी चांद , पर्वत और नदियों के कलकल से...

मैंने संभावनाएं ढूंढी है शून्य में भी,
जब चारों ओर था मौत का ताण्डव,
जब हर तरफ बिखरी थीं मायूसी,
नहीं हारी थी मैंने हिम्मत
दिया था हौसला लोगों को सावधानी वो बचाव के साथ जीने के लिए

मैंने संभावनाएं ढूंढी है शून्य में भी,
जब कोई भी नही था पास मेरे,
गांव के बाहर बसे हुए
अनजानों की बस्ती में
जलाये हैं दिवाली के दिये,
फुलझड़िया और पटाखे बच्चों के साथ
बिखेरे हैं होली के रंग
और लिया है गुझियों का स्वाद उन बुजुर्गों के साथ,
मैंने बटोर के जमा किए है उन लोगों की दुआये हजार
मैंने संभावनाएं ढूंढी है शून्य में भी।
नकारात्मकता से कोई वास्ता नहीं मेरा
दोपहर की धूप को,मुट्ठी में मैने भर लिया,
यह असंभव काम था,संभव इसे मैने कर लिया।
नीलम वन्दना

Wednesday, 2 March 2022

चिकन करी लॉ

ईमानदार आदमी जब भ्रष्ट होता है तो नस्लें नष्ट हो जाती है....
          सेवन हिल्स सिने क्रिएशन्स प्रोडक्शन में बनी फिल्म चिकन करी लॉ का लेखन, निर्देशन और संगीत शेखर सिर्रीनी जी का है।
          शेखर सिर्रीनी जी कहानी का अन्त थोड़ा से बदलाव के साथ और बेहतर कर सकते थे। निर्देशक के रुप में शेखर जी की तारीफ करनी चाहिए और फिल्म का संगीत भी बेहतरीन है जो कहानी के साथ साथ चलता है और कही भी अलग से थोपा हुआ सा महसूस नहीं होता।
         आशुतोष राणा सर एक मजे हुए कलाकार हैं और सीतापति शुक्ल(वकील) के रूप में वो हमेशा की तरह अपना प्रभाव डालने में सफल रहे हैं। माया जॉनसन के रूप में नतालिया जानोसज़ेक भी अपने अभिनय से अपने बलात्कार के दर्द को दिखाने का अच्छा प्रयास किया है
निवेदिता भट्टाचार्य सत्य देशमुख का प्रयास भी सराहनीय है। मकरंद देशपांडे मुथु स्वामी (विपक्ष के वकील) के रूप में, गणेश पई मकिया के रूप में,जाकिर हुसैन शरद जोशी (राजनेता) के रुप में तथा छगन पाटिल के रूप में अमन वर्मा के अभिनय कौशल अपना अपना प्रभाव डालने में सफल रहे हैं। फिल्म का अन्त थोड़ा से बदलाव के साथ और ज्यादा अच्छा हो सकता था।
         चिकन करी लॉ में कहानी है , एक विदेशी बेली डांसर माया की जिसके साथ मुंबई के एक राजनेता के एय्याश बेटों माकिया और नाना ने बलात्कार किया,और उसे मरने के लिए छोड़ दिया । एक सामाजिक कार्यकर्ता सत्या माया को न्याय दिलाने की कोशिश में  वकील सीतापति से मिलती है और दोनों मिलकर माया को न्याय दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ते। हालांकि इस लड़ाई में सत्या की मौत हो जाती है, और सीतापति कानूनी लड़ाई लड़ते हुए माया को न्याय दिलाने के लिए प्रयासरत रहते हैं। कानूनी दांवपेंच और राजनैतिक षड्यंत्र के चलते सबूतों और गवाहों के अभाव में कोर्ट आरोपियों को बरी कर देता है। लेकिन सीतापति जिसने माया को न्याय दिलाने का वादा किया था, हिम्मत नहीं हारता और माया को आखिरकार न्याय दिला कर ही मानता है।

          बाकी क्या है चिकन करी लॉ जानने के लिए फिल्म देखें।😊


Saturday, 26 February 2022

किसे है पता...

किसे है पता...

हम सब कौन है 
कहा से आये है
और जाना है कहा
किसे है पता...

कब कौन सा पल 
किसका आखिरी हो
किसे है पता

सबका है एक अस्तित्व
फिर भी ना जाने किस
अस्तित्व के लिए भिड़े
किसे है पता

इस अस्तित्व के
युद्ध में
कितने मरेंगे
और जाने कब तक मरेंगे 
किसे है पता
 
ना जाने कितने
मर मर के जियेगे
और ना जाने कितने
जी जी कर मरेंगे 
किसको है पता

लम्हों में होती हैं खता
सदियां भुगतती है सजा
किसको नहीं है पता

सबने मिलकर बनाया UNO
और चाहे शान्ति चहुंओर 
फिर भी ये क्यु 
सम्भव ना हो पाता  
किसे हैं पता
नीलम वन्दना

युद्ध की विभिषिका

युद्ध की विभिषिका
राष्ट्रध्यक्षो के आन बान और झूठी शान ने
सुरसा के आनन सा बढ़े हुए महात्वाकांक्षा ने
एक बार फिर से दो राष्ट्रों को झोंक दिया
युद्ध की विभिषिका में....
एक बार फिर से गोला बारूद  फटेंगे
जीवन रक्षक हथियार जीवन भक्षक का रुप धरेगे
हर तरफ बस डर नफरत और बेबसी होगी
बिखरी हर तरफ मौत की दहशत होगी
अनगिनत युवाओं की बलि होगी
 एक बार फिर से रक्त रंजित धरा होगी
कुछ नई लकिरे होगी और
और  फिर 
एक दिन यूं ही 
हार जीत के इस अभियान में
स्वामित्व के अंहकार में
रह जायेगा सब कुछ
थम जाएगा यह युद्ध भी,
दोनों राष्ट्राध्यक्ष हाथ मिला लेंगे,
कागज के कुछ टुकड़ों पर हस्ताक्षर कर लेंगे,
महात्वाकांक्षा की पिपासा में  रक्त सुरा के प्याले होंगे, दावतों के संग नई उपाधी, नये पदनाम और विजय पताका होगी
और ....
और  साथ ही मिलेंगी 
हर गली चौबारे पर 
बूढ़ी मां अपने उम्र के इस पड़ाव पर थकती आंखों से 
बेटों का इंतज़ार करते, 
हर घर के देहरी के भीतर 
बेबस आखो में आंसू भरे दिल को हौसला देते लड़किया अपने अपने पति, प्रेमी और भाईयों का राह तकते
घर के आंगन में मासूम से
गुमसुम बच्चे अपने 
पिता का इंतज़ार करते, 

किसी को कुछ नहीं पता कब क्या हो गया
और लूट गये, घर बार उनके
ना जाने किस बात की कीमत सबने चुकाती है
नीलम वन्दना